ईश्वर के झूठ लिए महान वैज्ञानिक गिओर्दनो ब्रूनो की हत्या

ईश्वर के भक्तों ने हमेशा से विज्ञान की उन्नति में बाधा पहूँचाई हैजिस कारण विज्ञान की उन्नति उतनी नहीं हो पाई जितनी होनी चाहिए। लोग धार्मिक अन्धविश्वासों और पाखंडो में इतने फंसे हुए थे कि वे विज्ञान के बारे में सोचना भी पाप समझते थे। बाइबिल के अनुसार, "ईश्वर ने पहले प्रकाश को अंधकार से अलग कियाफिर सर्ष्टि का निर्माण कियाप्रथ्वी सारे ब्रह्मांड की केंद्र है और सूर्य इसके चक्कर लगाता हैप्रथ्वी अचल है।"

गिओर्दनो ब्रूनो की तस्वीर। स्टीमक्र.कॉम से साभार।

ये नियम पादरियों ने जनता में कड़ाई से लागू किया हुआ था इसके विपरीत कोई सोच भी नहीं सकता था। कोपर्निकस जो की महान खगॊल शाष्त्री था उसने पादरियों के नियमो के विपरीत जा के आकाश में विभिन्न ग्रहों के विषय में जाना और पता लगाया की सूर्य प्रथ्वी के चक्कर नहीं लगाता बल्कि प्रथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है तथा प्रथ्वी अचल नहीं है।

उस समय पादरियों का इतना खौफ था समाज में की बाइबिल को कोई चैलेन्ज नहीं कर सकता था, इसलिए कोपर्निकस ने डर के कारण अपनी यह खोज लेटिन भाषा में लिखी ताकि पादरियों को जल्दी समझ न आये। जब पादरियों को पता चला की उसकी यह पुस्तक धर्म विरुद्ध है तो उन्होंने पुस्तक पर रोक लगा दी जिससे कई सालो तक वह पुस्तक दबी पड़ी रही।

फिर कोपर्निकस की वह पुस्तक एक लेटिन भाषी पादरी ज्योनर्दो ब्रूनो के हाथ लगी, वह नाम का पादरी था पर था बहुत जिज्ञासु। उसने जब कोपर्निकस की पुस्तक पढ़ी तो उसे सच्चाई का अहसास हुआ और वह चर्च में जाके इसकी सच्चाई सभी को बताने लगा। जब पादरियों को पता चला तो वे बहुत क्रोधित हुए और ब्रूनो को चर्च से निकाल दिया और उसे कठोर दंड देने की योजना बनाई जाने लगी।

ब्रूनो डर के मारे स्विजरलैंड भाग गया, पर उसने कोपर्निकस के सिधान्तो पर गहन अध्यन किया और पाया की कोपर्निकस बिलकुल सच कह रहा है। ब्रूनो ने टेलिस्कोप और दूरबीन के निर्माण द्वारा अपनी बात सिद्ध की कि प्रथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है और आकाश में अनेक तारे हैं जो प्रथ्वी से भी विशाल हैं।

ब्रूनो की इस खोज से चर्च इतना नाराज हुआ की उसने धोखे से ब्रूनो कैद कर लिया और उस पर धर्म के विरोध में प्रचार करने और इशनिन्न्दा कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया। उसे 8 साल कैद कर के रखा गया और कठोर यातनाये दी गई ,परन्तु इस महान और बहादुर खगोलशास्त्री ने धर्म के ठेकेदारों के आगे हार नहीं मानी।

अंत में 17 फरवरी 1600 ई. वी में ब्रूनो को जीवित ही जला दिया गया। उसे पीले कपडे पहना कर और सर पर जलती हुई आग रखी गई थी, ताकि ब्रूनो धीरे धीरे जले और अधिक पीड़ा का अनुभव कर सके। उसका जलूस शहर मे निकाला गया ताकि उसकी दर्दनाक मौत सब देख सके और कोई फिर ईश्वर के खिलाफ न जा सके ।

कहा जाता है की उस समय गिरजा घरो के घंटे बजा दिए गए थे ताकि अधि से अधिक लोग उसकी मौत का नजारा देख सके। इस तरह से लगभग हर धर्म में विज्ञान का विरोध हुआ, जिसने भी धर्म गुरुओ के दमनचक्र से जनता को मुक्ति दिलानी चाही उसको तरह तरह से प्रताडित किया गया।

...तो ईश्वरवाद और उसके दुकानदारो का सच भी आपकी आँखे न खोले तो इसका मतलब आप इस मानसिक बिमारी के शिखर पर हैं। जाग जाईए!

आर.पी. आर्या