नास्तिकों की पहचान को सरकार को क्यों मान्यता देनी चाहिए?



कोलकाता के बेथुन कॉलेज हाल में काफी चर्चित रहा, वह इसलिए क्योंकि वहाँ नए विद्यार्थियों के एडमिशन फॉर्म में अन्य धर्मों के साथ ह्यूमैनिटी का एक नया विकल्प भी भरने के लिए था। हिन्दू, ईस्लाम, ईसाई, सिक्ख, जैन, बौद्ध आदि धर्मों से अलग 'ह्यूमैनिटी' को एडमिशन फॉर्म में रखना वैसे तो काफी अच्छी पहल है। वैसे भी सभी धर्म ह्यूमैनिटी यानि मानवता का दावा करते हैं, ऐसे में किसी को उससे क्या आपत्ति हो सकती है।

लेकिन जिस तरह से मानवता से अलग हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई, जैन, बौद्ध आदि होने की भारत में हर व्यक्ति को अधिकार है, उसी प्रकार नास्तिक होने का भी है। भारत का संविधान तो हर व्यक्ति को अपने विचार, विश्वास और उपासना आदि की स्वतंत्रता देता है। ऐसे में क्यों नहीं भारत के सभी सरकारी संस्थानों व गैर-सरकारी संस्थानों में जहाँ भी धर्म का कॉलम हैं, वहां ‘नास्तिक’ अथवा ‘कोई धर्म नहीं’ भरने का विकल्प उपलब्ध हो?

जब इन्सान किसी खास धर्म को मानने के बाद भी ‘ह्यूमन’ यानि की ‘इन्सान’ हो सकता है, तो नास्तिक को इन्सान होने से क्यों दिक्कत होगी? ..और यदि मानव होना सर्वोपरि है, तब सभी धर्मों की जगह मात्र एक कॉलम ‘मानवता’ क्यों न रखा जाये?

एक विकल्प और भी हो सकता है कि सभी नौकरी, एडमिशन आदि से धर्म का कॉलम ही क्यों न हटा दिया जाये? जब किसी धर्म को विकल्प के तौर पर रखना अनिवार्य है, तब नास्तिकता को भी विकल्प के तौर पर रखना अनिवार्य होना चाहिए। एक कॉलम सबके लिए बढ़ा दिया जाये, ‘मानवता’।

यह इसलिए भी जरुरी है कि भारत में बड़ी तेज़ी से ‘नास्तिक’ अथवा ‘तर्कशील’ लोगों की संख्या बढ़ रही है। कुछ खुद को ‘धर्ममुक्त’ अथवा ‘आस्तिक’ और ‘नास्तिक से अलग ‘वास्तविक’ जैसे उपनाम भी पसंद कर रहे हैं। फेसबुक के कई पेज तथा ग्रुप मसलन ‘नास्तिकता प्रचार अभियान’, ‘नास्तिक भारत’, ‘इंडियन एथिस्ट्स’, ‘नास्तिक नेशन, द एथीस्ट आदि इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत में नास्तिकों की संख्या बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है।

क्या नास्तिकों की पहचान के लिए सरकार को धर्म अथवा विश्वास के कॉलम में नास्तिक, धर्ममुक्त अथवा कोई धर्म नहीं जैसे विकल्प नहीं रखने चाहिए? यह सवाल है, जो अब नास्तिकों को सरकार और समाज के बीच रखना चाहिए। जनगणना में भी नास्तिकों के लिए धर्म की जगह एक विकल्प जरुर हो। तभी भारतीय संविधान अपनी सेक्युलर होने की विशेषता को सबके लिए (नास्तिक सहित) समान भाव से लागू कर सकेगी।

– एडमिन, नास्तिक भारत

  तस्वीर CALEIDOSCOPE से साभार